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इस महाविद्यालय की स्थापना 01 सितम्बर 1986 को हुई। शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के नाम से प्रारंभ इस महाविद्यालय को शासनादेशानुसार वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ की प्राणदायिनी शिवनाथ नदी के नाम पर ‘शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय’ का नाम दिया गया। यह महाविद्यालय राजनांदगांव की पारंपरिक धरोहर रानी सागर की दक्षिण दिशा में ऊर्जा पार्क एवं वन विभाग नर्सरी के समीप सुरम्य प्रकृति की गोद में गौरव पथ पर स्थित है। महाविद्यालय 10 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में फैला है। जहाँ परिसर हरे-भरे बगीचे के साथ अनेक वृक्षों से आच्छादित एवं प्रदूषण मुक्त है। महाविद्यालय के वर्तमान भवन का उद्घाटन दिनांक 04 फरवरी 1992 को तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री माननीय श्री हिम्मत कोठारी जी द्वारा किया गया। महाविद्यालय द्वारा वर्ष 2017 में ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद, बैंगलुरू’ (NAAC) द्वारा प्रत्यायन करवाया गया। प्रत्यायन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में  महाविद्यालय को 2.29 सी.जी.पी.ए. के साथ ’ब’ ग्रेड प्राप्त हुआ है। यह महाविद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

महाविद्यालय में बी.एससी., बी.ए. एवं बी.काॅम की कक्षएं संचालित हैं। जीवविज्ञान (बायो) एवं गणित (मैथ्स) समूह के साथ कम्प्यूटर साइंस (स्ववित्तीय) की शिक्षा भी उपलब्ध है। शैक्षणिक सत्र 2016-17 स्नातकोत्तर स्तर पर दो विषयो  में रसायन शास्त्र एवं गणित तथा कम्प्यूटर शिक्षा के अंतर्गत पी.जी.डी.सी.ए. की कक्षायें संचालित हो रही हैं। महाविद्यालयीन यूथ रेडक्रास एवं राष्ट्रीय सेवा योजना की सक्रिय इकाईयों का लाभ विद्यार्थियों को मिलता रहा है।

महाविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, उच्च शिक्षा विभाग एवं अन्य विभिन्न योजनाओं से अनुदान प्राप्त हो रहा है। नवीन अधोसंरचना विकास के अंतर्गत महाविद्यालय परिसर 
में 10 अध्यापन कक्ष निर्माण पूर्ण हो चुका है। महाविद्यालय निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर है। 
महाविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं पर्यावरणीय योगदान के लिए दो ISO प्रमाण पत्र प्रदान किये गये हैं

विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तिव के विकास के लिए पाठ्य सहगामी गतिविधियों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिये स्पोकन इंग्लिश, व्यक्तित्व विकास, रोजगार के अवसरों की जानकारी विशेषज्ञो द्वारा समय-समय पर दी जाती है। महाविद्यालय में शैक्षिक, क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधिययों का आयोजन कर उनकी प्रतिभा को निखारने एवं उन्हें अभिप्रेरित करने का प्रयास किया जाता है। यह प्रसन्नता का विषय है कि महाविद्यालय ने अपनी स्थापना से लेकर उत्तरोत्तर विकास के नये आयाम गढ़े हैं। अब यहाँ विज्ञान के साथ-साथ कला एवं वाणिज्य की शिक्षा भी सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। महाविद्यालय के विकास में जनभागीदारी समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महाविद्यालयीन स्टाॅफ अपने छात्र/छात्राओं की सर्वांगीण प्रगति के लिये पूर्ण रूपेण समर्पित है।

Principal
Dr. (Smt) Suman Singh Baghe